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Bihar News: BPSC-AEDO परीक्षा धांधली में बड़ी गिरफ्तारी, बायोमीट्रिक ऑपरेटर अतुल राज पटना से गिरफ्तार

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | BPSC-AEDO परीक्षा में कथित धांधली के मामले में EOU ने बायोमीट्रिक ऑपरेटर अतुल राज पांडेय को गिरफ्तार किया है। जांच में सॉल्वर गैंग से कनेक्शन की पड़ताल जारी है।

पटना, 20 अगस्त। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर चल रही जांच के बीच BPSC-AEDO परीक्षा से जुड़े कथित धांधली मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने परीक्षा केंद्र पर बायोमीट्रिक ऑपरेटर के रूप में काम करने वाले अतुल राज पांडेय को पटना से गिरफ्तार किया है। EOU अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में उसकी भूमिका कितनी गहरी थी और क्या उसका संपर्क किसी संगठित सॉल्वर गिरोह से था।

मामला अप्रैल 2026 में आयोजित सहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी यानी AEDO परीक्षा से जुड़ा है। जांच के दौरान परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों और परीक्षा में शामिल संदिग्ध लोगों के बीच संभावित संपर्क सामने आने के बाद EOU ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया।

जांच एजेंसी के मुताबिक, अतुल राज पांडेय की तैनाती पटना के कंकड़बाग स्थित रघुनाथ उच्च बालिका विद्यालय परीक्षा केंद्र पर बायोमीट्रिक ऑपरेटर के तौर पर की गई थी। परीक्षा केंद्रों पर बायोमीट्रिक सत्यापन अभ्यर्थियों की पहचान और परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में इस व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के केंद्र में आ गई है।

मोबाइल से मिले डिजिटल सुराग

EOU की जांच में अतुल राज से जुड़े मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच के दौरान उसकी सहकर्मी दीपिका कुमारी के मोबाइल से भी परीक्षा से जुड़े कुछ डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है।

जांच टीम इन डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि परीक्षा के दौरान किन लोगों के बीच संपर्क हुआ, किस तरह की बातचीत हुई और क्या परीक्षा केंद्र की व्यवस्था से जुड़ी कोई जानकारी संदिग्ध लोगों तक पहुंचाई गई थी।

अतुल राज का मोबाइल फोन भी परीक्षा केंद्र से जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब फोन में मौजूद कॉल डिटेल, संदेश और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

AN कॉलेज परीक्षा भवन से भी सामने आया था मामला

इस पूरे प्रकरण में पटना के एएन कॉलेज परीक्षा भवन से जुड़ी घटना ने भी जांच को गंभीर बना दिया था। यहां परीक्षार्थी रोशन कुमार को कथित तौर पर बायोमीट्रिक कर्मी अंशुप्रिया से उत्तर पुर्जा लेते हुए पकड़े जाने की बात सामने आई थी।

इसके बाद जांच एजेंसी ने परीक्षा केंद्रों पर काम करने वाले कर्मचारियों की गतिविधियों और अभ्यर्थियों से उनके संभावित संपर्क को गंभीरता से लेना शुरू किया। EOU अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर हुई घटनाओं के बीच कोई आपसी कड़ी थी या नहीं।

अतुल की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल

अतुल राज की गिरफ्तारी के बाद जांच का सबसे बड़ा सवाल उसकी वास्तविक भूमिका को लेकर है। क्या वह केवल बायोमीट्रिक ऑपरेटर के रूप में परीक्षा केंद्र पर तैनात था या फिर परीक्षा में कथित गड़बड़ी कराने वाले नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा था?

EOU इसी बिंदु पर पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि परीक्षा केंद्र की व्यवस्था से जुड़ी जानकारी और प्रक्रिया का इस्तेमाल अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए किया गया हो सकता है।

हालांकि, जांच पूरी होने से पहले अतुल राज की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। फिलहाल EOU उसके खिलाफ सामने आए साक्ष्यों और अन्य आरोपियों से संभावित संपर्क की जांच कर रही है।

सॉल्वर गैंग से कनेक्शन की जांच

EOU के अनुसार, अतुल राज के संपर्क सॉल्वर गैंग से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर ऐसे कई लोगों के नाम बताए हैं, जिनका संबंध परीक्षा में गड़बड़ी के नेटवर्क से होने की आशंका है।

जांच एजेंसी अब इन नामों और उनके संपर्कों का सत्यापन कर रही है। अगर जांच में इन लोगों की भूमिका की पुष्टि होती है तो मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

EOU यह भी जांच कर रही है कि परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों और बाहरी लोगों के बीच किस तरह का संपर्क था। इसके लिए मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।

दो परीक्षाओं पर पड़ा था असर

अप्रैल 2026 में आयोजित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की शिकायतों और जांच के बाद BPSC ने संबंधित परीक्षाओं को रद्द कर दिया था। इसके बाद परीक्षा प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की जांच शुरू हुई।

मामले में 23 अप्रैल 2026 को पटना के श्रीकृष्णापुरी थाने में केस दर्ज किया गया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ने के साथ EOU ने भी मामले को अपने स्तर पर खंगालना शुरू किया।

जांच के दौरान परीक्षा केंद्रों की गतिविधियों, बायोमीट्रिक प्रक्रिया, संदिग्ध अभ्यर्थियों और उनसे जुड़े लोगों के संपर्क की जांच की जा रही है।

पहले भी परीक्षा व्यवस्था से जुड़े काम कर चुका है अतुल

जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि अतुल राज पहले कई प्रतियोगी परीक्षाओं में जैमर और बायोमीट्रिक से जुड़ी कंपनियों के साथ काम कर चुका है। इस वजह से उसे परीक्षा केंद्रों की तकनीकी व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े काम का अनुभव था।

EOU अब उसके पुराने काम और पूर्व परीक्षाओं में उसकी भूमिका की भी पड़ताल कर सकती है। जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं उसका संपर्क पहले से किसी परीक्षा धांधली नेटवर्क से तो नहीं था।

बेऊर जेल भेजा गया

गिरफ्तारी के बाद अतुल राज पांडेय को पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया के बाद बुधवार देर रात पटना की बेऊर जेल भेज दिया गया। अब मामले में आगे की जांच के साथ अन्य संदिग्धों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।

फिलहाल EOU की जांच डिजिटल साक्ष्यों, परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों और संदिग्ध सॉल्वर नेटवर्क के बीच संबंधों पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि BPSC-AEDO परीक्षा में कथित धांधली का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

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प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीकी व्यवस्था का इस्तेमाल पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया जाता है। बायोमीट्रिक सत्यापन इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यदि परीक्षा केंद्र से जुड़े किसी कर्मचारी पर ही गड़बड़ी में शामिल होने का संदेह सामने आता है तो मामला और गंभीर हो जाता है।

BPSC-AEDO मामले में अतुल राज की गिरफ्तारी के बाद जांच का फोकस केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। मोबाइल फोन और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों के जरिए संभावित संपर्कों की जांच इस मामले की दिशा तय कर सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच में सामने आए आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम निर्णय से पहले दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता। EOU को डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की वास्तविक भूमिका सामने लानी होगी।

अगर जांच में परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों और सॉल्वर नेटवर्क के बीच संगठित संपर्क साबित होता है तो यह प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी होगी। वहीं निष्पक्ष जांच से उन अभ्यर्थियों का भरोसा भी बहाल होगा जो मेहनत और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया के आधार पर चयन की उम्मीद रखते हैं।

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